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3 राजयोगों में मनेगा श्रीराम जन्मोत्सव, पूरे दिन रवि पुष्य और ग्रहों का महासंयोग

आज श्रीराम जन्म उत्सव मनाया जाएगा। इस बार ये पर्व तीन बड़े राजयोग और ग्रहों की विशेष स्थिति में मनेगा। भगवान राम की पूजा के लिए पूरा दिन शुभ रहेगा। लेकिन वाल्मीकि रामायण के मुताबिक भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम का जन्म चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर दोपहर में हुआ था। इसलिए कर्क लग्न और अभिजित मुहूर्त में पूजा के साथ जन्मोत्सव मनाना बहुत शुभ रहेगा।

पांच ग्रहों का शुभ संयोग
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के मुताबिक इस बार श्रीराम जन्मोत्सव पर तीन राजयोगों के साथ विशेष ग्रह-स्थिति रहेगी। चंद्रमा और शनि स्वराशि में रहेंगे। राहु-केतु उच्च राशि में और सूर्य मित्र राशि में रहेगा। इन ग्रह-योगों में किया गया व्रत, पूजा और दान का शुभ फल और बढ़ जाएगा।

10 साल बाद रामनवमी पर रवि पुष्य संयोग
ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट बताते हैं कि इस बार 10 साल बाद राम नवमी पर पूरे दिन पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। इससे पहले ऐसा शुभ संयोग 1 अप्रैल 2012 को बना था। इस शुभ संयोग में दिनभर खरीदारी और निवेश करना विशेष शुभ रहेगा। इस दिन किए गए लेन-देन से सुख और समृद्धि बढ़ेगी। इस दिन रियल एस्टेट में निवेश करने से फायदा होगा। साथ ही जरूरत की चीजें और हर तरह की खरीदारी के लिए दिन खास रहेगा। इसके बाद 6 अप्रैल 2025 को फिर ऐसा शुभ योग बनेगा।

अयोध्या में राम जन्मोत्सव
श्रीराम के जन्मोत्सव पर अयोध्या हर्षित होगी। श्रद्धालु रामनाम, सुंदरकांड और रामायण का कीर्तन करेंगे। मंदिर में श्रीराम प्रकटोत्सव मनाया जा रहा है। रविवार को दिन में ठीक 12 बजे श्री रामलला का जन्मोत्सव होगा। साथ ही जन्मभूमि व अयोध्या के मंदिरों में शंख ध्वनि और घंटे बजेंगे। आरती होगी और रामनाम का जाप शुरू किया जाएगा। जन्मभूमि मंदिर में षोडशोपचार और श्रृंगार के बाद श्री रामलला पीले वस्त्र धारण कर दर्शन देंगे।

पुत्रकामेष्टि यज्ञ से हुआ श्रीराम का जन्म
वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, राजा दशरथ जब बहुत बूढ़े हो गए तो संतान न होने के कारण चिंतित रहने लगे। तब ब्राह्मणों ने उन्हें पुत्रकामेष्टि यज्ञ की सलाह दी। महर्षि वशिष्ठ के कहने पर दशरथ ने ऋषि श्रृंग को इस यज्ञ के लिए बुलाया। यज्ञ पूरा होने के बाद अग्नि देव ने प्रकट हुए। उन्होंने खीर से भरा सोने का घड़ा दशरथ को दिया। वो खीर रानियों को खिलाने को कहा। दशरथ ने ऐसा ही किया। फिर एक साल बाद चैत्र शुक्ल नवमी पर पुनर्वसु नक्षत्र में कौशल्या ने श्रीराम को जन्म दिया। पुष्य नक्षत्र में कैकई ने भरत और सुमित्रा से जुड़वा बच्चे लक्ष्मण और शत्रुघ्न हुए।

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