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Nagpur | पिछड़ावर्गीय अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर महाआघाड़ी सरकार की उदासीन भूमिका

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डॉ. बाबासाहब आंबेडकर नेशनल एसोसिएशन ऑफ इंजीनियर्स (बानई) ने लगाया आरोप

नागपुर ब्यूरो : पिछड़ावर्गीय अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर महाआघाड़ी सरकार पर टालमटोल करने और उदासीन भूमिका अपनाने का आरोप डॉ. बाबासाहब आंबेडकर नेशनल एसोसिएशन ऑफ इंजीनियर्स (बानई) की ओर से नागपुर में आयोजित पत्र परिषद में लगाया गया है.

कुलदीप रामटेके ने कहा कि राज्य में 70 हजार से अधिक अनुसूचित जाति, जनजाति, भटके विमुक्त, पिछड़ावर्गीय अधिकारी व कर्मचारी पिछले 4 वर्षों से पदोन्नति से वंचित हैं. पिछड़ा संवर्ग के अधिकारी, कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर शासन निर्णय रद्द किया गया. 29 दिसंबर 2017 के शासन निर्णय (जीआर) के अनुसार पिछड़ावर्गीय की पदोन्नति में 33 प्रतिशत स्थान आरक्षित रखकर खुला प्रवर्ग को पदोन्नति दी जाती थी, परंतु 7 मई 2021 के सामान्य प्रशासन विभाग के जीआर के अनुसार पिछड़ावर्ग की आरक्षित 33 प्रतिशत जगहें भी खुले प्रवर्ग के अधिकारी, कर्मचारियों को दी जा रही हैं. खुले प्रवर्ग से पदोन्नति देने की कार्यवाही बहुत तेजी से मंत्रालय स्तर पर चल रही है. वास्तव में पिछड़ावर्ग का आरक्षण के द्वारा पदोन्नति का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के बावजूद राज्य सरकार ने 7 मई 2021 के जीआर के माध्यम से पिछड़ावर्ग की जगहें खुले प्रवर्ग को उपलब्ध कराकर पिछड़ावर्ग को लेकर अपनी भूमिका व मानसिकता स्पष्ट कर दी है.

विजय मेश्राम ने कहा कि पिछड़वर्ग के पदोन्नति के संदर्भ में मंत्री गुट की स्थापना हुई थी. इस मंत्री गुट के अध्यक्ष उपमुख्यमंत्री अजित पवार हैं. उन्होंने पिछड़ावर्ग के हित में कोई भूमिका लिए बगैर 7 मई 2021 के जीआर का समर्थन किया है और पिछड़ावर्गियों के संवैधानिक अधिकार का आरक्षण रद्द हो गया.

जयंत इंगले ने कहा कि 14 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में पिछड़ावर्ग के पदोन्नति आरक्षण को लेकर सुनवाई हुई है. इसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पिछड़ावर्ग को पदोन्नति में आरक्षण के संदर्भ में राज्य अपनी भूमिका स्पष्ट करें. इसके अनुसार महाराष्ट्र सरकार से कार्यवाही की अपेक्षा है. लेकिन न्यायालय के अंतरिम आदेश के बाद भी राज्य सरकार अनदेखी कर रही है. अब सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 5 अक्तूबर को होगी. इससे पूर्व पिछड़ावर्ग का प्रतिनिधित्व दर्शाने वाले डाटा को मुख्य सचिव की समिति विधि व न्याय विभाग के माध्यम से अधिकृत कर सुप्रीम कोर्ट में तत्काल प्रस्तुत करें, कर्नाटक सरकार की रत्नप्रभा समिति की तरह सुप्रीम कोर्ट में पूर्णकालिक फॉलोअप के लिए महाराष्ट्र सरकार भी सक्षम अधिकारी की तत्काल नियुक्ति करें और 7 मई 2021 के जीआर के अनुसार हो रही पदोन्नतियों को तत्काल स्थगित करने की मांग संगठन ने की है. अन्यथा महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्तूबर से नागपुर में सभी पिछड़ावर्ग संगठनों के माध्यम से कानूनी तरीके से संघर्ष शुरू होगा. इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की रहेगी. पत्र परिषद में बानई के इंजीनियर एम.एस. भालाधरे, राहुल परुलकर, पी.एस. खोब्रागड़े, सुधन ढवले और अरविंद गेडाम उपस्थित थे.

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