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Gudi Padwa : जानें शुभ मुहूर्त, कथा और तोरण, पताका लगाने का क्या है नियम

Photo: Moonlight Dharampeth Nagpur

गुड़ी पड़वा खास तौर पर महाराष्ट्र में मनाया जाने वाला त्योहार है. चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर नए हिंदू वर्ष की शुरुआत होती है, जिसके प्रारंभ की खुशी को लेकर इस पर्व को मनाया जाता है. इस बार गुड़ी पड़वा 13 अप्रैल 2021, मंगलवार को है. इस दिन से नवरात्र प्रांरम्भ होने के साथ-साथ हिंदू धर्म के नववर्ष की शुरुआत भी होगी.

गुड़ी पड़वा पर्व का शुभ मुहूर्त

प्रतिपदा तिथि आरंभ –  12 अप्रैल 2021 सुबह 8 बजकर 1 मिनट से शुरू

पताका लगाने की सही दिशा और विधि 

गुड़ी  का अर्थ है ‘विजय पताका’. 13 अप्रैल को अपने घर के साउथ ईस्ट कोने यानि अग्नि कोण में पांच हाथ ऊंचे डंडे में, सवा दो हाथ की लाल रंग की ध्वजा लगानी चाहिए. ध्वजा लगाते समय जिन देवताओं की उपासना करके उनसे अपनी ध्वजा की रक्षा करने की प्रार्थना की जाती है, उनके नाम हैं- सोम, दिगंबर कुमार और रूरू भैरव. यह ध्वजा जीत का प्रतीक मानी जाती है. मान्यता है कि घर पर ध्वजा लगाने से केतु के शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और साल भर घर का वास्तु अच्छा रहता है.

घर पर ऐसे लगाएं तोरण

ध्वजा के अलावा इस दिन घर के मुख्य दरवाजे पर आम के पत्ते या न्यग्रोध का तोरण भी लगाते हैं और तोरण लगाते समय महेन्द्र, ब्राम्ही, दिगम्बर कुमार और असितांग भैरव आदि शक्तियों का स्मरण करते हैं. मान्यता है कि ये शक्तियां घर के मुख्य द्वार की रक्षा करती हैं और घर के सभी दोषों को दूर करती हैं. आज के दिन जो व्यक्ति घर के दरवाजे पर आम या न्यग्रोध के पत्तों का तोरण, यानी बन्दनवार लगाकर महेन्द्र, ब्राह्मी, दिगम्बर कुमार और असितांग भैरव की पूजा करके उन्हें प्रणाम करता है, उसके घर के मुख्य द्वार से साल भर निगेटिव शक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहता है. साथ ही मुख्य द्वार पर आम के पत्तों या न्यग्रोध का तोरण लगाने से घर पर किसी की बुरी नजर नहीं लगती. किसी तरह का जादू-टोना घर पर असर नहीं करता. आज के दिन पीपल, तुलसी, नीम, बरगद और बहेड़ा के वृक्ष लगाना भी बड़ा ही शुभ माना जाता है.

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