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आत्मनिर्भर | यूट्यूब से सीख कर ऑर्गेनिक गुड़ बना रहे हैं मनोज

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आत्मनिर्भरता की ये कहानी है बागपत से लगभग 15 किलोमीटर दूर के गांव ढिकाना की। गांव में घुसते ही आपको गुड़ की सौंधी खुशबू का एहसास होगा। ये गुड़ पूरी तरह ऑर्गेनिक और सेहत के लिए फायदेमंद है। दो साल पहले इसी गांव के मनोज आर्य ने ऑर्गेनिक गुड़ बनाना शुरू किया था। अब वे रोल मॉडल बन गए हैं। गांव के ज्यादातर किसान उनसे ट्रेनिंग लेकर ऑर्गेनिक गुड़ तैयार कर रहे हैं और अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। खुद मनोज हर साल 5-6 लाख रुपए गुड़ बेचकर कमा लेते हैं।

आईएएस बनने का सपना था, ‍सिलेक्ट नहीं हुए

मनोज कई राह से गुजरकर इस मुकाम तक पहुंचे हैं। वे आईएएस बनना चाहते थे, 1994-95 में पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए। दिल्ली में रहकर उन्होंने कई सालों तक तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हो सके। इसके बाद वे सामाजिक सरोकार से जुड़े काम करने लगे। साल 2006 में वे एक सूचना का अधिकार कार्यकर्ता के रूप में अरविंद केजरीवाल की टीम से जुड़ गए।

इसके बाद मनोज अन्ना आंदोलन से जुड़ गए। कई मंचों पर उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में जब आम आदमी पार्टी का गठन हुआ तो वे भी उससे जुड़ गए। वे पार्टी में कई पदों पर रहे, लेकिन वक्त बीतने के बाद 2016 में राजनीति से उनका मन ऊब गया। वे अब कुछ नया करने का प्लान करने लगे।

वॉट्सऐप ग्रुप से जुड़े तो आया खेती का आइडिया

मनोज के पिता रिटायर्ड प्रिंसिपल हैं। एक भाई दिल्ली में लेक्चरर है और दूसरा भाई बागपत के बड़ौत में एक स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर तैनात है। घर में खेती पहले से थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता था। मनोज की भी खेती में कोई दिलचस्पी नहीं थी।

मनोज कहते हैं कि जब मैंने राजनीति छोड़ी तो एक मित्र ने मुझे किसानों के वॉट्सऐप ग्रुप से जोड़ दिया। उसमें तरह-तरह के कंटेंट और वीडियो आते थे। इसमें खेती से जुड़े वीडियो भी आते थे। इन सबको देखते-देखते मेरी रुचि खेती की तरफ होने लगी। चार साल पहले पिता और भाइयों की मदद से मैंने गन्ने की खेती शुरू की। चूंकि मैं इस फील्ड में नया था, खेती का कोई अनुभव नहीं था। इसलिए फसल उत्पादन के बाद मुझे चीनी ‍मिलों के चक्कर काटने पड़े, काफी वक्त भी जाया हुआ और कुछ खास मुनाफा भी नहीं हुआ।

यूट्यूब से सीखी ऑर्गेनिक खेती

पहली बार खेती में नुकसान हुआ तो मनोज को थोड़ी तकलीफ हुई, लेकिन वे निराश नहीं हुए। उन्होंने अब नए तरीके से खेती करने का इरादा किया। वे यूट्यूब पर खेती से जुड़े वीडियो देखने लगे। गन्ने की खेती और बेहतर, और इनोवेटिव तरीके से कैसे की जा सकती है, इसको लेकर वे लगातार ऑनलाइन सर्च करते रहते थे। इसी दौरान एक किसान ने उन्हें गन्ना बेचने के बजाय गुड़ बनाकर बेचने का सुझाव दिया। मनोज को यह आइडिया पसंद आया और अगले साल उन्होंने चार-पांच हजार रुपए खर्च कर गुड़ बनाना शुरू कर दिया।

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