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Christmas 2020: क्यों मनाया जाता है क्रिसमस का त्योहार?

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भारतीय समाज उत्सव मनाने वाला समाज है. भारत में सभी धर्म के त्योहारों को बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है. क्रिसमस एक ऐसा त्योहार है जिसका ताल्लुक तो ईसाई धर्म से है लेकिन पूरे विश्वभर में इसे हर प्रकार के लोगों द्वारा मनाया जाता है. ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए क्रिसमस का यह दिन बड़ा दिन इसलिए भी होता है क्योंकि माना जाता है कि इस दिन प्रभु यीशु का जन्म हुआ था. क्रिसमस संता क्लॉज, तोहफों, केक और शुभकामनाओं का भी पर्व है.

क्रिसमस का इतिहास क्या है?

क्रिसमस शब्द की उत्पत्ति क्राइस्ट मास शब्द से हुई है. ऐसा माना जाता है कि पहला क्रिसमस 336 ई. में रोम में मनाया गया था. 25 दिसंबर को प्रभु ईसा मसीह का जन्मदिवस मनाते हैं और इसे बड़ा दिन मानते हुए जश्न मनाते हैं. ईसाई धर्म के प्रचार के पूर्व रोमन जाति द्वारा यह दिन त्योहार के रूप में मनाया जाता था.

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ईसा मसीह के जन्म की कहानी

बढ़ई यूसुफ तथा मरीयम (मेरी) नजरेन में रहते थे. मरीयम को स्वप्न में भविष्यवाणी हुई कि उसे देवशिशु के जन्म के लिए चुना गया है. इसी बीच सम्राट ने नए कर लगाने हेतु लोगों के पंजीकरण की घोषणा की, जिसके लिए यूसुफ और मेरी को अपने गांव बेथलहम जाना पड़ा. मेरी गर्भवती थी. कई दिनों की यात्रा के बाद वह बेथलहम पहुँची. तब तक रात हो चुकी थी. उसे सराय में विश्राम के लिए कोई स्थान न मिल सका. जब यूसुफ ने विश्रामघर के रक्षक को बताया कि मेरी गर्भवती है और उसका प्रसव समय निकट है तो उसने पास के पहाड़ों की उन गुफाओं के विषय में बताया, जिनमें गडरिए रहते थे. यूसुफ और मेरी एक गुफा में पहुँचे. यूसुफ ने खुरली साफ की. उसमें नर्म, सूखी, साफ घास का गद्दा बनाया. अगली सुबह मेरी ने वहीं शिशु को जन्म दिया. जो प्रभु ईसा मसीह थे.

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कौन हैं संता क्लॉज?

जिन्हें हम सभी संता क्लॉज के नाम से जानते हैं. वास्तव में वे संता निकोलस हैं जिनका जन्म ईसा मसीह की मृत्यु के लगभग 280 साल बाद मायरा में हुआ था. उन्होंने अपना पूरा जीवन प्रभु यीशू को समर्पित कर दिया था. वे दिनभर उनकी सेवा करते थे. स्वभाव से दयालु होने के कारण वे लोगों की हमेशा मदद किया करते थे. प्रतिवर्ष यीशू के जन्मदिन के मौके पर रात के अंधेरे में बच्चों को उपहार दिया करते थे. इस वजह से आज भी क्रिसमस पर संता क्लॉज का बच्चों को इंतजार रहता है. घर के बड़े इन्हीं संता निकोलस का रूप धरकर बच्चों को उपहार बांटते हैं.


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