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आत्मनिर्भर | देहाती किचन से ऑनलाइन होती है मकई रोटी-सरसो साग की डिलीवरी

मुजफ्फरपुर ब्यूरो : जिला खादी ग्रामोद्योग संघ नें आत्मनिर्भर भारत और सबल गांव बनाने की दिशा में एक अनोखी पहल की है. खादी का यह प्रयास न सिर्फ रोजगार के नये आयाम खोल रहा है बल्कि देशी मक्के की रोटी और सरसो के साग से पिज्जा -बर्गर जैसे आधुनिक खानपान को चुनौती दे रहा है. खादी की पहल पर मुजफ्फरपुर के किसानों का ग्रुप बनाकर रोटी साग के डिजीटल कारोबार की शुरुआत की गयी है.

इस अभिनव प्रयोग में गांव के किसानों के घरों में मक्के की रोटी साग बनवाकर उसकी होम डिलीवरी कराई जा रही है. इस योजना में ठेठ गंवई परम्परा से लेकर आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. रोटी साग को पारंपरिक स्वाद का टच देने के लिए इसे गांव में लकड़ी के चूल्हे पर तैयार किया जाता है तो दूसरी ओर इसकी मार्केटिंग डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जाती है.

पहले चरण में 50 किसानों का समूह

पहले चरण में पचास किसानों का समूह बनाया जा रहा है जो अपने अपने घरों में मक्के की रोटी और सरसो का साग तैयार करेंगे. खादी ग्रामोद्योग संघ इसकी डिजिटल मार्केटिंग कर रहा है. मार्केटिंग के लिए भंसा-घर नामक एक प्रकोष्ठ बनाया गया है जिसका प्रचार सोशल मीडिया के माध्यम से किया जा रहा है. प्रचार में दिए गये मोबाइल नंबर पर जो भी आर्डर आते हैं उसके अनुसार ताजा रोटी साग तैयार करके पैक कर होम डिलिवरी की जाती है.

इस योजना से जुड़े समाजसेवी किसान अनिल अनल बताते हैं कि पिज्जा बर्गर के दौर में देशी स्वाद खोता जा रहा था. उन्होनें कहा कि बड़ी बड़ी पार्टियों में आजकल मक्के की रोटी और सरसो साग का काउन्टर लगाया जाता है जिसे लोग चाव से खाते हैं. उसी को देखकर उनके मन में यह ख्याल आया क्यों न इसे व्यवसाय के तौर पर विकसित किया जाए.

फिर उन्होनें मुजफ्फरपुर जिला खादी ग्रामोद्योग संघ के अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार के सामने यह प्रस्ताव रखा और उनके निर्देश पर काम शुरु कर दिया गया.अनल बताते हैं कि घी लगी रोटी साग के साथ आंवला की चटनी और हरी मिर्च का जायका परोसा जाता है जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं. योजना से जुड़े किसान शिवपूजन राय बताते हैं कि इस डिश की तैयारी में मसाला का उपयोग बिल्कुल नही किया जाता है.

सर्दी के मौसम के अनुसार साग में सरसो तेल और रोटी में घी लगाया जाता है. शिवपूजन राय घर में मिले इस रोजगार से काफी खुश हैं क्योंकि घर की महिलाओं का स्कील का पूरा पूरा उपयोग हो रहा है. जिला खादी ग्रामोद्योग संघ के अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार बताते हैं कि महात्मा गांधी का सपना बना था कि गांव में हर हाथ को काम मिले और गांव सबल बने, इसे देखते हुए आत्मनिर्भर गांव की अवधारणा पर यह शुरुआत की गयी है.


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