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#Nagpur | शीतसत्र नागपुर में नहीं होने से व्यापार की हानि; कैट राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया

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नागपुर ब्यूरो : नागपुर में होने वाले महाराष्ट्र सरकार के शीतकालीन सत्र के दौरान विधायकों के अलावा बड़ी संख्या में अधिकारियों और राज्य भर के नागरिकों का आगमन शहर में होता है जिससे व्यापार एवं पर्यटन के अवसर पैदा होते हैं। इस वर्ष शीतकालीन सत्र नागपुर में न होकर मुंबई में आयोजित किया जा रहा है जिससे स्थानीय व्यापार को क़रीब 500 करोड़ रुपए का नुकसान होगा,यह कहना है काॅन्फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया का।

टीम कैट नागपुर द्वारा यहां आयोजित एक बैठक में नागपुर में शीतकालीन सत्र के न होने के प्रभाव पर भरतिया अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नागपुर करार के अनुसार शीतकालीन सत्र नागपुर में आयोजित किया जाता है। इससे यहां की समस्याओं और विकास के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने में आसानी होती है।

इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों का आगमन होता है फलस्वरुप उनका ख़ान पान, रहने आदि के खर्च का सीधा लाभ यहां के व्यापार को होता है। सभी लोग यहां के पर्यटन स्थलों को भी जाते हैं जिससे पर्यटन बढ़ता है। विदर्भ की पारंपरिक हस्तकला सामग्री और मिठाईयां यहां से खरीदकर ले जाते हैं।

सभी लाॅज,होटल फुल रहते हैं।आटो, रिक्शा,चायटपरी,साउथ सेंट्रल कल्चरल सेंटर में हस्तकला प्रदर्शनियों में अच्छी बिक्री होती है। व्यापारिक दृष्टि से शीतकालीन सत्र विदर्भ के लिए दूसरी दिवाली की तरह आर्थिक गतिविधियों वाला होता है।बहुत बडे पैमाने पर साधारण लोगों के लिए रोजगार सृजित होते हैं।

किशोर धाराशिवकर ने कहा कि यही एक मौका होता है जब विदर्भ के मुद्दों को ज़ोरदार ढंग से उठाया जाता है। कपड़ा उद्योग से गोपाल अग्रवाल ने कहा कि सत्र में कपड़ों का भी बड़ा व्यापार होता है। स्वर्णकार राजकुमार गुप्ता का कहना है कि इस दौरान आभूषणों की बिक्री में भी बढ़ोतरी देखी गई है। जयकिशन लालवानी ने कहा कि संतरा, संतरा बर्फी, सोनरोल का भी बडा व्यापार होता है। टीम कैट नागपुर ने बजट सत्र नागपुर में लेने की मांग की। ऐसी जानकारी कैट के राज्य सचिव महेंद्र मंडलेचा ने दी।

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