इंसान के जिंदा रहने के लिए जितना सांस लेना जरूरी है उतना ही जरूरी सही नींद लेना भी है. अक्सर हम नींद की सेहत को लेकर कम ही फ्रिकमंद होते हैं, लेकिन शरीर की सेहत के साथ नींद की सेहत भी सही रहनी जरूरी है. इसकी अहमियत को जताने के लिए ही वर्ल्ड स्लीप डे भी मनाया जाता है. हालांकि स्लीप हेल्थ को लेकर इस साल भारतीयों के लिए खुशखबरी है उनकी इस हेल्थ में सुधार के संकेत मिले हैं.
जल्दी सोने लगे हैं भारतीय
भारतीयों ने 2019 के आखिर से लेकर अब तक कोविड -19 पैनडेमिक की वजह से घर से काम करने का एक साल पूरा कर लिया और इसने हमारे जीने और काम करने के तरीके को बदला है.द ग्रेट इंडियन स्लीप स्कोरकार्ड (जीआईएसएस) 2021 नींद की हेल्थ में सुधार के संकेत दिखाता है.हालांकि जीआईएसएस यह भी बताता है कि 92% भारतीय अभी भी सोने से पहले अपने फोन को देखते हैं.वर्ल्ड स्लीप डे (19 मार्च) से पहले स्लीप एंड होम सॉल्यूशंस कंपनी वेकफिट द्वारा प्रकाशित वार्षिक ग्रेट इंडियन स्लीप स्कोरकार्ड (जीआईएसएस) 2021के मुताबिक, रात 10 बजे से पहले बिस्तर पर जाने वाले लोगों की संख्या में 100 फीसदी की वृद्धि देखी गई है. जल्दी सोने की यह प्रवृति 18-वर्ष के बच्चों के बीच सबसे अधिक है, जिनमें से 50 फीसदी अब रात 10 बजे से पहले सोने जा रहे हैं जबकि पहले 2020 में ये केवल 22 फीसदी थे. यही नहीं आधी रात के बाद की नींद लेने वालों संख्या में भी गिरावट आई है. ये 28 से 26 फीसद पर आ गए हैं.
दिलचस्प बात यह है कि इस साल 24% लोगों ने कहा कि वे अनिद्रा से डरते हैं. जबकि बीते साल इनका आंकड़ा केवल 19 फीसदी ही था.ये नतीजे 16,000 उत्तरदाताओं के डेटा पर आधारित हैं, जो भारत के 18 शहरों में रह रहे हैं और जिनकी उम्र 18 से 45 साल तक है. इनका मार्च 2020 से लेकर फरवरी 2021 तक सर्वे किया गया. जब से कोराना पैनडेमिक है तब से कुल मिलाकर भारतीय अपनी नींद पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि सर्वे में 42% ने कहा है कि गद्दे की बेहतर गुणवत्ता से उनकी नींद की गुणवत्ता में वृद्धि होगी. जबकि पिछले साल ऐसा मानने वाले लोगों की संख्या केवल 22% थी. हालांकि अभी भी स्क्रीन की लत एक भयावह परेशानी बनी हुई है, जिसमें 92% कहते हैं कि वे बिस्तर पर जाने से पहले अपने डिवाइसेज को देखते हैं.
जानें वर्ल्ड स्लीप डे के बारे में
साल 2008 से उत्तरी गोलार्ध के वसंत विषुव से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को वर्ल्ड स्लीप सोसायटी वर्ल्ड स्लीप डे मनाती आ रही है. 14 मार्च को पहला वर्ल्ड स्लीप डे मनाया गया था. पहले स्लीप डे का स्लोगन था -स्लीप वेल लीव फुली अवेक. साल 2021 में यह शुक्रवार 19 मार्च को पड़ रहा है और इसका स्लोगन है- रेगुलर स्लीप, हेल्दी फ्यूचर. इस दिन को मनाने का उद्देश्य अच्छी नींद के फायदों को बताने उसका जश्न मनाने और नींद की कमी से होने वाली परेशानियों, बीमारियों और उसके इलाज व रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक करना है. इस दिन दुनिया भर में इस विषय पर शैक्षिक चर्चाएं, प्रर्दशनियां, प्रेजेंटेशन होने के साथ कई तरह के प्रोग्राम होते हैं. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी वर्ल्ड स्लीप डे सेलीब्रेट किया जाता है.
नींद जरूरी क्यों है
जिस तरह से इंसान को फिट और हेल्दी रखने के लिए खाने और एक्सरसाइज के महत्व को नकारा नहीं जा सकता है. उसी तरह नींद का भी इंसानी जिंदगी में एक अहम स्थान है. एक स्टडी के मुताबिक, एक इंसान को हेल्दी रहने के लिए रोजाना 6-8 घंटे सोना जरूरी है. अगर सही तरीके से नींद नहीं लेते हैं तो दिल की बीमारियों, अवसाद और डायबीटीज का खतरा बढ़ जाता है.
जींस पर निर्भर करती है इंसान की नींद
इंसान की नींद उसके जींस पर निर्भर करती है.किसको कितना सोना चाहिए ये जींस पर ही टिका है. आमतौर पर वयस्कों के लिए रात में सात से नौ घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है, लेकिन एथलीट्स को 10 घंटे तक सोना चाहिए, इससे उनकी परफॉर्मेंस अच्छी हो सकती है,क्योंकि इससे उनके शरीर में एनर्जी को रीस्टोर होने और मसल्स की मरम्मत में मदद मिलती है. हालांकि वयस्कों की तुलना में बच्चे अधिक सोते हैं. एक नवजात शिशु 14 से 17 घंटे सोता है.




















