Home हिंदी Nagpur : महिलाओं पर बढ़ते यौन हिंसा के खिलाफ निकाली गई रैली

Nagpur : महिलाओं पर बढ़ते यौन हिंसा के खिलाफ निकाली गई रैली

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नागपुर ब्यूरो : मुस्लिम महिला मंच, लर्न, नागरिक अभियान, एवजदार कामगार संगठन, ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन, स्टार्ट, नेशनल हॉकर फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में यौन हिंसा के विरोध में गुरुवार, 29 अक्टूबर को एक रैली का आयोजन किया गया. विरोध प्रदर्शन के लिए छोटा ताजबाग से सक्करदरा चौक तक रैली निकाली गई.

रैली को संबोधित करते हुए रुबीना पटेल ने कहा कि हाथरस की दर्दनाक घटना में उत्तर प्रदेश की पुलिस ने भी बलात्कारियों का समर्थन करते हुए केस को दबाने की कोशिश की. हमारा समाज किस और जा रहा है ? हम पीड़िता के साथ है या बलात्कारियों के साथ? ऐसी यौन शोषण की घटनाओं के पीछे विकृत मानसिकता, जो की पितृसत्ताक समाज की देन है इसे बदलने की जरुरत है. जब तक सोच में परिवर्तन नहीं आएगा महिलाओं को सम्मान नहीं देंगे, तब तक मर्दों का महिलाओं के प्रति देखने का नजरिया नहीं बदलेगा.

जम्मू आनंद ने कहा कि समाज की व्यवस्था को बदलने की और एक नए समाज की निर्मिति की आवश्यकता है. इस नए समाज की निर्मिति में हमे लड़को से शुरआत करनी है कि वे महिलाओं और लड़कियों को इज्जत दे उनका सम्मान करे. इस रैली में मुस्लिम महिलाएं और लड़कियों की सहभागिता को देखते हुए कहा की यह भी एक बहुत बड़ा बदलाव है जहाँ मुस्लिम महिलाएं यौन हिंसा जैसी घटना पर सड़क पर उतरी है.

शाहिना शेख ने कहा कि हम जब भी आजादी के नारे लगाते है तो हमसे कहा जाता है कि हम आजाद देश में ही है. लेकिन हम महिलाओं की आजादी कहा है? हम देर रात तक बाहर काम नहीं कर सकते ,क्योंकि सुनसान अँधेरी रात में हमे चलने पर डर महसूस होता है. हम अपने ही देश में सुरक्षित नहीं है. यदि देर हो जाये तो घर के लोग चिंतित क्योँ होते है ? इसलिए कि हम एक लड़की है और हमारे साथ कभी भी, कही भी यौन हिंसा हो सकती है और अभी इस यौन हिंसा का रूप और भी घृणित होकर पीड़िता की जिंदगी को ख़त्म कर देता है. हम कैसे इसे रोके ? क्या हमे समाज को बदलने की आवश्यकता है और यदि है तो यह बदलाव हमे अपने घर से अपने परिवार से करना होगा.

रैली में मनीषा वाल्मिकी, निर्भया, आसिफा, प्रियंका रेड्डी, सोनी सूरी, अंकिता पिसुड़े, खैरलांजी आदि की पीड़िताओं को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि अर्पण की गई. रैली की समाप्ति में प्रतीक्षा मानवटकर ने कहा की हम लड़कियों को भी इंसान की नजरों से देखा जाएं, ना की हवस की नजरों से.


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