Home हिंदी कभी सिलबट्टे बनाकर बेचती थीं, अब पीएसआई हैं पद्मशीला

कभी सिलबट्टे बनाकर बेचती थीं, अब पीएसआई हैं पद्मशीला

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“असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती”

प्रस्तुत पंक्तियां उस प्रतिभा को सटीक साबित होती है जिसने ईमानदारी से कोशिशें जारी रखी और आज खुद को साबित कर दिया. ये सही है कि प्रतिभा की कोई परिभाषा नहीं होती और न ही प्रतिभा को बांधने का कोई बंधन होता है इस बात को प्रमाणित कर दिया है महाराष्ट्र के भंडारा जिले की पद्मशीला तिरपुडे ने जिसने अपने संघर्ष के दिनों में हार नहीं मानी और सारी महिलाओं के लिए प्रेरणा साबित हुई.

 

पद्मशीला ने मज़दूरी कर पत्थर के सिलबट्टे बनाकर बेचने के साथ पढ़ाई जारी रखी और एक दिन ये मेहनत रंग लायी है. एमपीएससी की पीएसआई पद के लिए ली गई परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद आज पद्मशीला पुलिस उपनिरीक्षक हैं. दस साल पहले भंडारा जिले के वाकेश्वर के पास के ही गांव के तुकाराम खोब्रागडे से प्रेम विवाह करने वाली पद्मशीला बताती है की शुरुवाती दिनों में दोनों पति पत्नी मजदूरी करके जीवन यापन कर रहे थे जितना कमाते उतना दिन भर के जीवन यापन के लिए पर्याप्त था. लेकिन एक दिन उसके पति को मजदूरी में मिले 50 रूपए कहीं खो गए और वो दिन इनके लिए बहुत दुःख भरे बीते. उस दिन दोनों ने कुछ नहीं खाया रात भर सिर्फ ये ही सोचते रहे कि अपनी इस ज़िंदगी को कैसे बदलेंगे. तब पति ने ये तय किया कि कुछ भी हो वो अपनी पत्नी की आगे की पढ़ाई जारी रखेंगे. इसके लिए ओपन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया गया.

इस बीच सिलबट्टे और फल बेचते पद्मशीला ने स्नातक पूरा किया और एमपीएससी का एग्जाम क्लियर करने के बाद आज पुलिस उपनिरीक्षक हैं. पद्मशीला आज उन सभी महिलाओ के लिए प्रेरणा है जो थोड़ी सी विपरीत परिस्थिति में हार मान लेती है और पद्मशीला स्त्री -पुरुष के उस रिश्ते की भी मिसाल बनी हैं जिसमे दोनों एक दूसरे की हिम्मत बनते है और एक दूसरे को आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते है.


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