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कश्मीर की धरती ने लाल रंग की चादर ओढ़ी, हर जगह चिनार के पत्ते खूबसूरती बिखेर रहे

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चिनार कश्मीर की खूबसूरती का अहम हिस्सा है। यह कश्मीर की धरोहर है, उसकी आत्मा में रचा-बसा है। हाल ही में कश्मीर में पतझड़ बीता है, अब सर्दियां शुरू हो गई हैं। ऐसे में कश्मीर की धरती चिनार के पत्तों से पटी पड़ी है, उसके रंग में रंगी है। इस वजह से कश्मीर की खूबसूरती और अधिक बढ़ गई है। दरअसल चिनार के पत्तों की खासियत है कि वे मौसम के हिसाब से अपना रंग बदलते हैं। गर्मियों में चिनार के पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं। जबकि पतझड़ के मौसम में इसके पत्तों का रंग पहले रक्त की तरह लाल, गहरा पीला और फिर पीले रंग में बदल जाता है।

कश्मीर चिनार का गढ़ है। चाहे घाटी हो, शहर हो, गांव हो हर जगह चिनार के पेड़ आपको मिल जाएंगे। यह तस्वीर श्रीनगर के मुगल गार्डन की है। नवंबर-दिसंबर महीने में यहां आने वाले टूरिस्टों के लिए यह खास आकर्षण का केंद्र होता है।

कश्मीर में पतझड़ का सीजन हाल ही में बीता है। चिनार के पत्ते चारों तरफ बिखरे पड़े हैं। इन पत्तों की खूबसूरती की वजह से इसे लोग हटाते नहीं हैं। लोग लंबे वक्त तक इसके रोमांच में लोग घुले रहना चाहते हैं।

चिनार कश्मीर में एक तरह से यह धार्मिक प्रतीक भी है। तस्वीर अनंतनाग के बिजबेहरा स्थित शिव मंदिर की है। मंदिर के ठीक पीछे चिनार का प्लांट उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहा है।

चिनार कश्मीर की विरासत का हिस्सा है, धरोहर है। यहां कई प्लांट सैकड़ों साल पुराने हैं। कश्मीर के बिजबेहरा में 400 साल पुराने चिनार के पेड़ हैं। जिसकी हाइट करीब 70 फीट तक है।

ऐसा कहा जाता है कि चिनार की उत्पत्ति ग्रीस में हुई है। भारत में यह पर्शिया से आया है। एक चिनार प्लांट को 30 से 50 साल मैच्योर होने में लगते हैं। जबकि पूरी तरह विकसित होने में करीब 150 साल तक का वक्त लगता है।

कश्मीर में यह महीना सैलानियों से गुलजार रहता है। लोग इस मौसम में चिनार की खूबसूरती और रोमांच का जमकर आनंद लेते हैं। हजारों की संख्या में लोग पूरे परिवार के साथ यहां पहुंचते हैं और एंज्वॉय करते हैं।

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