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नियमों को धता बताकर हो रहा था गायों का ट्रेन से परिवहन

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नागपुर के पशुप्रेमियों की कोशिशों से उजागर हुआ मामला

नागपुर : कुरुक्षेत्र से 116 हाइब्रिड की गाय संजीवनी डेयरी फॉर्म से मालक द्वारा खरीद कर एसएनपी बीडब्ल्यूटी नंबर की मालवाहक ट्रेन में रविवार की रात को 6 कंटेनरो के माध्यम से भेजे गए. यह ट्रेन बुधवार को भंगारपेट कर्नाटक पहुंचने वाली है. इसमें बड़ी ही बेरहमी से गायों को ठूंस कर ले जाया जा रहा था. हालांकि नागपुर की पशुप्रेमी करिश्मा गलानि की अगुआई में इस ट्रेन को रोककर जब निरिक्षण किया गया तो नियमों की अनदेखी उजागर हुयी.

करिश्मा गलानि ने बताया कि कोलार स्थित व्यंकटेश डेयरी फार्म के लिए ये गाय ख़रीदे जाने की जानकारी है. मुझे मंगलवार दोपहर को एक बजे स्टेशन मास्टर अतुल श्रीवास्तव का फोन आया था. उन्होंने जानकारी दी कि एक गाय ट्रेन में मर गई है. उसको उतार कर पंचनामा करवाना है. मैंने पूरी जानकारी ली और मुझे आश्चर्य हुआ कि पहली बार इतनी सारी गाय मालवाहक डिब्बों में 3 दिन के सफर पर भेजी गई है. मैंने हमारी संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती मेनका गांधी को पूरी जानकारी दी. श्रीमती गांधी ने रेलवे के उच्च स्तर के अधिकारी डिविजनल कमिश्नर आशुतोष पांडेय से बात की और उन्हें नियम के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा. मुझे भी वहां पहुंचने के लिए कहा. मैं लगभग 2 बजे रेलवे स्टेशन पर पहुंची ट्रेन वहां खड़ी थी. सभी उच्च अधिकारी वहां पहुंच चुके थे. पशु परिवहन एक्ट 1978 के पूरे के पूरे नियमों की धज्जियां उड़ाई नजर आई. 6 डिब्बे में 116 गाय सफर कर रही थी. एक डिब्बे में 16 से 20 गाय थीं. जो कि 1978 के नियमों के विरुद्ध है. एक डिब्बे में 10 पशुओं से ज्यादा सफर नहीं कर सकते.

गर्भवती गाय को सामान्य गायों के साथ नहीं रखा जा सकता. फिर भी गर्भवती गाय को सामान्य गायों के साथ रखा गया था. जो गाय मरी वह गर्भवती थी. 1978 के नियम के अनुसार ट्रेन की बोगियों में पर्याप्त हवा और रोशनी होनी जरूरी है. लेकिन मालवाहक डिब्बे में इसका अभाव था. इसके साथ जो पशु चिकित्सक का सर्टिफिकेट जोड़ा गया था वो भी सरासर गलत सर्टिफिकेट था. रेलवे के उच्च अधिकारियों ने इस बारे में किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं किया। इसलिए अब मैं इस क्रूरता के खिलाफ में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाउंगी.

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