Home National अमृत महोत्सव विशेष : आजादी के गवाह लाल किले को जानिए

अमृत महोत्सव विशेष : आजादी के गवाह लाल किले को जानिए

नई दिल्ली: आज देश की आजादी की उम्र 74 साल हो गई है 75वें साल में पदार्पण के साथ हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं. आज दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र आजादी की एक और सीढ़ी चढ़ गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज लाल किले पर जब तिरंगा फहराएंगे तब आजादी के साए में पनपा लोकतंत्र खुद को पहले से और भी ज्यादा मजबूत महसूस करेगा.

साल 1947 से लेकर आजतक आजादी के जश्न का एक बड़ा गवाह कोई मौजूद है तो वो है दिल्ली का लाल किला. 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसी लाल किले से ऐतिहासिक भाषण दिया और तिरंगा फहराया. इसके बाद सालों साल लाल किले की प्राचीर पर फहराए जाने वाले तिरंगे ने दुनिया को संदेश दिया कि भारत अब स्वंत्रता के आसमान में सफलता की ऊंची उड़ान के लिए तैयार है. लाल किले की मजबूत दीवारें भारत की सांस्कृति और धार्मिक एकता की मजबूती को भी दर्शाती हैं.

लाल किले के इतिहास पर एक नजर

लाल किला वर्ष 1648 में मुगल सम्राट शाहजहाँ के शासनकाल में बनाया गया था. इसे उस्ताद अहमद लाहौरी ने डिजाइन किया था. इसे बनाने वाले प्रमुख कारीगर हामिद और अहमद थे. इसमें बड़े पैमाने पर लाल रंग के पत्थर के इस्तेमाल के कारण इसे लाल किला कहा जाता है. यमुना के किनारे बना यह ऐतिहासिक किला 35 फीट ऊंची दीवारों से घिरा है. दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, मुमताज महल, खास महल, मोती मस्जिद, हम्माम और शाह बुर्ज इस किले के मुख्य आकर्षण हैं. लाल किले को प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थलों और अवशेष अधिनियम, 1959 के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया है. साल 2007 में यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति ने किले को “उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य” की संपत्तियों की एक सूची में जोड़ा. जो इसे धरती की “सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत” का हिस्सा बनाती है.

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